आहत सिक्के (पंचमार्क सिक्के)

आहत सिक्के/ पंचमार्क सिक्के – 500 ई.पू. के लगभग पुराने सिक्के जो दूसरी शता. ई.पू. तक के प्राप्त हुये हैं।

भारत में प्रचलित प्राचीन मुद्रा तथा मुद्रा प्रणाली की शुरुआत हुई।

प्रारंभ में चांदी के आहत सिक्के सर्वाधिक थे, ताँबे , काँसे के सिक्के भी प्राप्त हुये हैं।

आहत सिक्के धातु के टुकङे पर चिन्ह विशेष ठप्पा मारकर (पीटकर) बनाए जाते थे। आहत सिक्कों पर चिन्हों के अवशेष भी मिलते हैं जैसे – मछली, पेङ, मोर, यज्ञ वेदी, हाथी, शंख, बैल, ज्यामीतीय चित्र (वृत्त, चतुर्भुज, त्रिकोण ), खरगोश।

इन सिक्कों का कोई नियमित आकार नहीं था। ये राजाओं द्वारा जारी नहीं किए गए माने जाते हैं , बल्कि व्यापारिक समूहों से संबंधित माने गए हैं।

अधिकांश आहत सिक्के पूर्वी  यू.पी.(इलाहाबाद, शाहपुरा) तथा बिहार(मगध) से मिले हैं।

आहत सिक्कों के प्रचलन से व्यापार में सुदृढता प्राप्त हुई। नवीन संपन्न वर्गों का उदय हुआ।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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