मगध महाजनपद के उदय के कारण

मगध महाजनपद 16 महाजनपदों में सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था।

मगध का सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद  में मिलता है।

इसके शक्तिशाली होने के कई  कारण हैं ,जो निम्नलिखित हैं-

भौगोलिक स्थिति-

 

मगध उत्तर भारत के विशाल तटवर्ती मैदानों के उपरी एवं निचले भागों के मध्य अति सुरक्षित स्थान पर था। पांच पहाङियों के मध्य एक दुर्गम स्थान पर स्थित होने के कारण वहां तक शत्रुओं का पहुंचना प्राय: असम्भव था।

गंगा नदी के कारण भी मगध में व्यापारिक सुविधायें बढ़ी और आर्थिक दृष्टि से मगध के महत्व में वृद्धि हुर्इ । मगध साम्राज्य की भूमि अत्यधिक उपजाऊ थी अत: आर्थिक दृष्टि से मगध सम्पन्न राज्य था ।

मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में हाथियों के बाहुल्य ने भी मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मगध साम्राज्य में लौहा बहुतायत और सरलता से मिलता था । मगध की शक्ति का यह महत्वपूर्ण स्त्रोत था । मगध का क्षेत्र लौह उत्पादन का केन्द्र था।लौहे का उपयोग मजबूत युद्ध शास्रों एवं कृषि उपकरण दोनों में उपयोगी था।  जंगल साफ करके खेती के लिये भूमि निकाली जा सकती थी और उपज बढ़ार्इ जा सकती थी ।

मगध के लोगों की सोच तथा दृष्टिकोण में खुलापन था। मगध क्षेत्र वैदिक संस्कृति से कम प्रभावित था ।                  उदाहरण के तौर पर हम देख सकते हैं-नागदशक को हटाकर शिशुनाग को हराना तथा महापद्मनंद को शासक बनाना।

यहाँ के लोगों ने नये-2 परिवर्तनों को भी अपनाया था।

मगध के शासकों की भूमिका ने भी मगध साम्राज्य के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी-

  • बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंध, मित्रतापूर्ण संबंध बनाएँ।
  • अजातशत्रु भी साम्राज्य विस्तार का आकांक्षी था।
  • कई शासकों(शिशुनाग तथा महापद्मनंद) ने कूटनीति का प्रयोग किया ।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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