मुगल भू-राजस्व अधिकारी

mughal e azam

अन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

मुगल राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत यद्यपि कर निर्धारण प्रत्येक कृषक से किया जाता था, परंतु लगान एकत्र करने का कार्य जमीदार,ताल्लुकेदार,मुकद्दम तथा पाटिल इत्यादि करते थे।

भू-राजस्व प्रशासन की मुख्य इकाई ग्राम थी जिसमें मालगुजारी(लगान) से संबंधित दो अधिकारी होते थे-

  1. मुकद्दम और
  2. पटवारी।

मुकद्दम एवं पटवारी वंशानुगत अधिकारी होते थे। मुकद्दम मालगुजारी वसूल करता था जिसके पारिश्रमिक के रूप में उसे ढाई प्रतिशत नकद या राजस्व मुक्त भूमि मिलती थी।

पटवारी गाँव की आय-व्यय का लेखा-जोखा रखता था उसे भी पारिश्रमिक के रूप में उसके द्वारा वसूले गये राजस्व का 1 प्रतिशत दस्तूरी के रूप में मिलता था।

गाँव की परती भूमि एवं चारागाह भूमि पर ग्राम समुदाय का स्वामित्व न होकर राज्य का अधिकारी होता था।

जिन गाँवों को मदद-ए-माश माफी और वक्फ के रूप में लगान मुक्त अनुदान दिये जाते थे, उन्हें एम्मा ग्राम कहा जाता था।

परगने में आमिल,कानूनगो तथा अमीन भू-राजस्व के प्रमुख अधिकारि होते थे। आमिल भू-राजस्व निर्धारित करता था तथा कानूनगो इस कार्य में उसकी सहायता करता था।

अकबर ने अपनी दहसाला प्रणाली को लागू करने के लिए 1573ई. में बंगाल,बिहार और गुजरात को छोङकर संपूर्ण उत्तरी भारत में करोङी नामक एक अधिकारी की नियुक्ति की।

मुक्तई (मिश्रित प्रणाली) में गाँव के मालिक से दो-तीन वर्ष के लिए एकमुश्त लगान का करार किया जाता था।

फ्रांसीसी चिकित्सक बर्नियर ने मुगल सूबेदारों के अत्याचारपूर्ण कार्यों का वर्णन करते हुए कहा है- ऐसे समय में जब कोई भूमि प्राप्त करता था। वह उसे अधिकाधिक निचोङता था कि गरीब मजदूर उसे छोङकर अन्यत्र भाग जाते थे।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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