मुगलकाल के उच्च अधिकारी

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अन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

मुगलकालीन केन्द्रीय शासन व्यवस्था के अधीन कई अधिकारियों के पद थे। जिनके द्वारा उनका शासन प्रबंध व्यवस्थानुसार चलता था। मुगलकालीन महत्त्वपूर्ण उच्चाधिकारी निम्नलिखित थे-

  1. मीर अातिश- यह शाही तोपखाने का प्रधान था यह मंत्रिपद नहीं होता था।इसकी सिफारिश पर महत्त्वपूर्ण नगरों में केन्द्र द्वारा कोतवाल की नियुक्ति होती थी।
  2. साहिब-तौजीह- यह सैनिक लेखाधिकारी होता था।
  3. दीवान-ए-तन – यह वेतन और जागीरों से संबंधित अधिकारी होता था।
  4. दरोगा-ए-डाक चौकी – गुप्तचर विभाग होता था।
  5. मीर-ए-अर्ज- यह बादशाह के पास भेजे जाने वाले आवेदन पत्रों का प्रभारी होता था।
  6. मीर-ए-बहर – यह जल – सेना का प्रधान होता था। इसका प्रमुख कार्य शाही नौकाओं की देखभाल करना था।
  7. मीर-ए-तोजक(मीर-ए-तुजुक) – यह धर्मानुष्ठान का अधिकारी होता था। इसका कार्य धार्मिक उत्सवों आदि का प्रबंध करना होता था।
  8. मीर-ए-बर्र- यह वन-विभाग का अधीक्षक था।
  9. नाजिर-ए-बयूतात – यह शाही कारखानों का अधीक्षक होता था।
  10. वाकिया-नवीस – यह समाचार लेखक होता था। जो राज्य के सारे समाचारों से केन्द्र को अवगत कराता था।
  11. खुफिया-नवीस – यह गुप्त पत्र-लेखक होते थे। जो गुप्त रूप से केन्द्र को महत्त्वपूर्ण खबरें उपलब्ध कराते थे।
  12. परवानची – ऐसी आज्ञाओं को लिखने वाला, जिस पर सम्राट के मुहर की आवश्यकता नहीं पङती थी।
  13. हरकारा – ये जासूस और संदेशवाहक दोनों होते थे।
  14. स्वानिध-निगार – ये समाचार लेखक होते थे।
  15. वितिक्ची – अकबर ने अपने शासन काल के 19वें वर्ष दरबार की सभी घटनाओं एवं खबरों को लिखने के लिए इनकी नियुक्ति की। इसके अतिरिक्त यह प्रांतों की भूमि एवं लगान संबंधी कागजात तैयार करता था। यह अमलगुजार के अधीन कार्य करता था।
  16. मुशरिफ- यह राज्य द्वारा तैयार आय- व्यय के लेखा-जोखा की जांच करता था।
  17. मुस्तौफी( लेखा परीक्षक) – यह मुशरिफ द्वारा तैयार आय-व्यय के लेखा- जोखा की जांच करता था।
  18. अमिल-अकबर ने अपने शासन के 18वें वर्ष गुजरात,बिहार एवं बंगाल को छोङकर संपूर्ण उत्तर भारत में एक करोङ दाम आय वाले परगनों की मालगुजारी वसूलने के लिए नियुक्त किया, जिसे जनसाधारण में करोङी कहा जाता था।
  19. मुसद्दी-यह बंदरगाहों के प्रशासन की देखभाल करता था।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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