बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला कौन था

सिराजुद्दौलाअन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

बंगाल के नवाब सिराजुदौला से पूर्व अलीवर्दी खां ही एक मात्र बंगाल का नवाब था जिसने कंपनी (अंग्रेजी एवं फ्रेंच) की गतिविधियों को नियंत्रित करते हुए कलकत्ता और चंद्रनगर की किलेबंदी के सुदृढीकरण का विरोध किया।

  • सिराज-उद्-दौला(1756-57ई.)-

अलीवर्दी के बाद उसका नाती सिराज 10अप्रैल,1756ई. को बंगाल का नवाब बना।सिराज के बारे में जोन लॉ ने कहा कि वह न केवल विभिन्न प्रकार के व्यभिचारों के लिए अपितु अपनी क्रूरता के लिए भी कुख्यात था। हर कोई सिराजुद्दौला के नाम से कांपता था।

सिराज-उद्-दौला के राजगद्दी के प्रतिद्वदी और विरोधियों में प्रमुख थे पुर्णिया के नवाब शौकतजंग (चचेरा भाई), सिराज की मौसी घसीटी बेगम तथ उसका सेनापति मीरजाफर (अलीवर्दी का दामाद), आदि।

अपने विरोधियों के दमन के क्रम में सिराजुद्दौला ने मौसी घसीटी बेगम को बंदी बना लिया, तथ सेनापति मीरजाफर को हटाकर उसके स्थान पर मीरमदान को नियुक्त किया।मोहन लाल नामक एक कश्मीरी युवक को सिराज ने इतना शक्तिशाली बना दिया कि वह प्रधानमंत्री जैसा व्यवहार करने लगा।

1756ई. में सिराज ने पुर्णिया के शौकतजंग के दमन हेतु प्रस्थान किया।अक्टूंबर1756 ई. में मनिहारी के युद्ध में सिराज ने शौकत को पराजित कर उसकी हत्या कर दी।

इसी समय सिराजुद्दौला को मुगल शासक से एक फरमान मिला जिसमें बंगाल,बिहार, तथा उङीसा पर उसकी सूबेदारी का अनुमोदन कर दिया गया था।

सिराज का अंग्रेजों से संबंध कङवाहट भरा था,जिसके लिए कई कारण जिम्मेदार थे,जिनमें प्रमुख इस प्रकार थे-

  1. अंग्रेजों द्वारा नवाब की सत्ता की अवहेलना कर उसके विरुद्ध षङयंत्र में शामिल लोगों को बढावा देना।
  2. नवाब को कंपनी द्वारा कासिम बाजार फैक्ट्री के निरीक्षण की अनुमति न मिलना।
  3. नवाब की अनुमति के बिना फोर्ट विलियम को किलेबंदी को सुदृढ करना।
  4. फर्रुखसियर द्वारा प्रदत्त व्यापार का विशेष अधिकार दस्तक का कंपनी के कर्मचारियों द्वारा अपने निजी व्यापार में किया जा रहा दुरुपयोग।
  5. नवाब के राज्यारोहण के समय उसे उचित सम्मान एवं उपहार कंपनी द्वारा न देना।

सिराज-उद-दौला और कंपनी के बीच होने वाले संघर्ष के लिये उपर्युक्त कारण ही जिम्मेदार थे।

दस्तक प्रथा-

  • दस्तक वस्तुतः कर मुक्त व्यापार करने का परमिट या पारपत्र था।1717ई. में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी फरमान में सीमाशुल्क से मुक्त व्यापार करने की अनुमति के बाद कलकत्ता की अंग्रेज फैक्ट्री का प्रसीडेंट दस्तक को जारी करता था।

दस्तक से कंपनी के कर्मचारी  दो तरह से लाभ कमाते थे, एक दस्तक तो वे दस्तक द्वारा बिना  चुंगी दिये व्यापार करते थे और दूसरी ओर ये दस्तक अपने भारतीय मित्रों को बेच कर भी कमाते थे।

प्लासी के युद्ध के बाद दस्तक की सुविधा को समाप्त कर दिया गया।

सिराज ने समुचित कारणों के आधार पर मई,1756ई. में कासिम बाजार पर आक्रमण का आदेश उस पर कब्जा कर लिया।

कलकत्ता के गवर्नर ड्रेक को ज्वारग्रस्त फुल्टा द्वीप में शरण लेनी पङी,मिस्टर हॉलवेल अपने कुछ सहयोगियों के साथ नवाब के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया।

काल कोठरी की घटना-

  • 20जून,को फोर्ट विलियम के पतन के बाद सिराज ने बंदी बनाये गये 446 कैदियों को जिसमें स्री और बच्चे भी थे को एक घुटन युक्त कमरे में बंद कर दिया।21जून को प्रातःकाल तक कमरे में केवल 21व्यक्ति ही जीवित बचे जिसमें अंग्रेज अधिकारी हॉलवेल भी शामिल थे।

अंग्रेज इतिहासकारों ने 20-21जून की इस घटना को काल कोठरी त्रासदी की संज्ञा दी।

अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता पर पुनः अधिकार करने के लिए अक्टूंबर 1756में मद्रास से राबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में सैनिक अभियान को कलकत्ता भेजा गया, इस सैन्य अभियान में एडमिरल वाट्सन क्लाइव का सहायक था।

क्लाइव ने पहले बजबज पर फिर 2जून,1757 को कलकत्ता पर अधिकार कर लिया,क्लाइव ने बढते हुए प्रभाव से भयभीत नवाब ने संधि का प्रस्ताव रखा।

अलीनगर की संधि

  • 9फरवरी,1757ई. को कंपनी और नवाब सिराज के मध्य संपन्न अलीनगर की संधि की शर्तों के अनुसार नवाब ने मुगल सम्राट द्वारा कंपनी को प्रदत्त समस्त व्यापारिक सुविधा को स्वीकार कर लिया।
  1. जिन अंग्रेज फैक्ट्रियों पर नवाब ने कब्जा किया हुआ ता को वापस करते हुए युद्ध हर्जाना भी दिया।
  2. अंग्रेजों को सिक्का ढालने एवं कलकत्ते में किलेबंदी करने का भी अधिकार मिल गया।18अगस्त,1757ई. को अंग्रेजों ने कलकत्ता में अपनी टकसाल स्थापित की।
  3. बंगाल स्थित फ्रांसीसी बस्ती चंद्रनगर पर अधिकार कर कंपनी ने नवाब से कहा कि फ्रांसीसियों को बंगाल से बाहर निकाल दे जिसे नवाब को मानना पङा।
  4. सिराज की कमजोर हो रही स्थिति को महसूस कर अंग्रेजों ने मुर्शिदाबाद की गद्दी पर अपने किसी कठपुतली शासक को बैठाने की बात सोचने लगे,जिसमें सिराज के विरोधियों ने भी उनका साथ दिया।
  5. सिराज के विरोधियों में मीरजाफर जिसे नवाब ने सेनापति के पद से बर्खास्त किया था, राय दुर्लभ जो दीवान के पद पर कार्यरत था को नवाब ने मोहनलाल का अधीनस्थ बना दिया था तथा बंगाल के जगत सेठ शामिल थे जिन्हें कभी नवाब ने अपमानित किया था।
  6. सिराज के विरुद्ध सक्रिय दरबारी षड्यंत्रकारियों और अंग्रेजों के बीच अप्रैल-मई 1757ई. में कुछ गुप्त समझौते हुए,इस समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका अमीचंद्र और वाट्सन (कासिम बाजार का प्रमुख) की थी।
  7. मीरजाफर को सिराज के बाद अगला बंगाल का नवाब प्रस्तावित कर अंग्रेज प्लासी के युद्ध की तैयारी में जुट गये।

Reference :  http://www.indiaolddays.com

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