झूंसी

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल झूंसी

यह स्थल इलाहाबाद के पूर्व दिशा में लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर गंगानदी के तट पर स्थित है। इसका का प्राचीन नाम प्रतिष्ठानपुर मिलता है। मूलतः यहाँ एक ठोस टीला था जो अब बरसाती नालियों तथा लोगों के अतिक्रमण के कारण कई टीलों में विभक्त हो गया है। समुन्द्रकूप नामक टीला जो भूतल से 16 मीटर ऊँचा है, अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित अवस्था में है।

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जौगढ़

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल जौगढ़

उड़ीसा प्रान्त के गंजाम जिले में यह स्थान स्थित है। यहाँ की एक चट्टान के ऊपर अशोक का शिलालेख अंकित है। अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद वहाँ अपना अधिकार कर लिया तथा अपने लेख खुदवाये थे। अन्य लेख धौली से मिलता है। इन लेखों में अशोक द्वारा न्याय-प्रशासन के क्षेत्र में किये गये सुधारों का विवरण सुरक्षित है।

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मुस्लिम साम्राज्य

मुहम्मद गौरी का आक्रमण तथा भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना

गोर, महमूद गजनवी के अधीन एक छोटा सा पहाङी राज्य था। महमूद के निर्बल उत्तराधिकारियों के समय में यहाँ के सरदारों ने अपनी शक्ति का विस्तार प्रारंभ किया। गोर के शंसबानी राजवंश के शासकों ने गजनी पर अधिकार कर लिया। गजनी नगर को ध्वस्त कर दिया गया। 1173 ईस्वी में शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी, जिसका एक नाम मुइजुद्दीन मुहम्मद बिन साम भी था, वहाँ का राजा बना तथा इसके बाद तीन वर्षों तक गोर साम्राज्य का उत्कर्ष होता रहा। मुहम्मद गौरी वीर एवं महत्वाकांक्षी था।

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जोरवे

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल जोरवे

जोरवे महाराष्ट्र प्रान्त के अहमदनगर जिले में गोदावरी की सहायक नदी प्रवरा के बायें तट पर स्थित है। 1963 ई. में एच. डी. संकालिया ने यहाँ उत्खनन कार्य करवाया था जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक स्तरों का उद्घाटन हुआ। यहाँ के उत्खनन से ताम्रपाषाणिक युग की एक ऐसी संस्कृति का पता चलता है जो महाराष्ट्र की अपनी संस्कृति है तथा जिसका विस्तार विदर्भ और कोंकण को छोड़कर समूचे महाराष्ट्र में दिखाई देता है।

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साप्ताहिक समसामयिक क्विज : फरवरी 2020 भाग 3

हाल ही बाॅलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री वहीदा रहमान को किशोर कुमार सम्मान-2018 से सम्मानित किया गया है।

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जोगलथम्बी

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल जोगलथम्बी

महाराष्ट्र प्रान्त के नासिक जिले में यह स्थित है। यहाँ से क्षहरात शासक नहपान के सिक्कों का एक बड़ा ढ़ेर प्राप्त हुआ है। इसमें लगभग 13250 सिक्के है। इनमें दो-तिहाई से भी अधिक सिक्के ऐसे है जो सातवाहन नरेश गौतमीपुत्र शातकर्णि द्वारा पुनः अंकित कराये गये है।

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जूनागढ़

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल जूनागढ़

गुजरात प्रान्त में स्थित जनपद जिसका उल्लेख गिरिनार अथवा गिरनगर के रूप मे भी मिलता है।(द्रष्टव्य गिरनार)।

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जखेड़ा

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल जखेड़ा

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में कालिन्दी नदी के बायें तट पर अतरंजीखेड़ा से सोलह किलोमीटर की दूरी पर यह पुरास्थल स्थित है। स्थानीय लोगों ने इसे ‘कुसक’ (Kusak)कहते है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से के. एन. निज़ामी की रेखदेख तथा एम. डी. साही के निर्देशन में यहाँ खुदाई की गयी थी।

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चन्द्रगिरि

प्राचीन इतिहास तथा संस्कृति के प्रमुख स्थल चन्द्रगिरि

मैसूर (कर्नाटक राज्य) में कावेरी नदी के उत्तरी तट पर कलबप्पू नामक एक पहाड़ी है। यहाँ से 9वीं शता. के दो लेख मिले है जिनसे पता चलता है कि इसका प्राचीन नाम चन्द्रगिरि था। लेख जैन धर्म से सम्बन्धित है।

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