सिंधु सभ्यता के स्थल,निर्माता,काल निर्धारण,आयात की वस्तुएं, पतन के कारण

हङपा(मांटगोमरी जिला, पंजाब, पाकिस्तान )- इस स्थल का उत्खनन 1921ई. में दयाराम साहनी द्वारा करवाया गया। मोहनजोदङो (सिंध का लरकाना जिला, पाकिस्तान)- 1922ई. में राखलदास बनर्जी द्वारा उत्खनन का कार्य …

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सिंधु घाटी सभ्यता

 सिंधु घाटी सभ्यता(CIVILIZATION) –    सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह सभ्यता  सिंधु-सरस्वती , हङप्पा सभ्यता के नाम से भी जानी …

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लौह काल

उत्तर भारत में ताम्र काल के बाद लौह काल प्रारंभ हुआ तथा मगध का उत्कर्ष इसका प्रमाण है। दक्षिण भारत में पाषाण काल के पश्चात लौह काल आया, दक्षिण भारत …

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ताम्र पाषाण काल(3500/4000ई.पू.) ( ताम्रपाषाण संस्कृति)

पाषाण – ताँबा – ताँबा+टिन = कांसा – लौह सबसे पहले मानव द्वारा काम में ली गई धातु – ताँबा ताम्र + पाषाण  = ताम्रपाषाणिक संस्कृति इस संस्कृति में ताँबा …

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नवपाषाण काल

  नवपाषाण काल (नियोलेथिक काल) (6000/7000से 3000 वर्ष पू.) नवपाषाण काल को जॉन लुबाक ने नवपाषाण संस्कृति की संज्ञा दी है। तथा गॉर्डन चाइल्ड ने भी यह कहा है। इसका …

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शैल चित्रकला

पुरापाषाण काल एवं मध्यपाषाण काल के शैलाश्रयों में उत्कीर्ण चित्रों से तत्कालीन मानव की कलात्मक अभिव्यक्ति प्रकट होती है। पुरापाषाण काल की शैल चित्रकला के अवशेष भीमबेटका से प्राप्त हुए …

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पुरापाषाण काल के स्थल

नेवासा  नेवासा की खोज ( महाराष्ट्र ) H.D. संकालिया ने की थी । यहाँ से मध्यपुरापाषाण व निम्नपुरापाषाण काल के उपकरण प्राप्त हुए हैं । संकालिया ने इस स्थल को …

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मद्रास संस्कृति

1863 में मद्रास के समीप पलवरम से रॉबर्ट ब्रुस फुट ने हस्त कुठार प्राप्त की । इसे मद्रास संस्कृति नाम दिया गया । मद्रास के समीप अतिरमपक्कम् से भी हस्तकुठार …

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प्रमुख अरबी लेखक – अलबरूनी एवं इब्नबतूता

अरबी लेखक- अरबी यात्री, भूगोलवेता,तथा इतिहासकार 8वी.शता. के बाद भारत की ओर आकर्षित हुए। प्रारंभिक अरब लेखकों ने भारत के इतिहास के बारे में लिखने के स्थान पर यहाँ के निवासियों …

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