मुगल साम्राज्य में भूमिदान क्या थाः जागीर,मदद-ए-माश,ऐम्मा,वक्फ,खालसा,अलतमगा

जागीर एवं खालसा

अन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

मुगल साम्राज्य का अधिकांश भाग भूमिदान के रूप में दिया गया था। भूमिदान निम्न प्रकार के होते थे-

  • जागीर –

वह भूमि जो मनसबदारों को उनके वेतन के बदले में दी जाती थी।यह हस्तानांतरित भी होती थी।

  • वतनजागीर-

यह अधीनस्थ राजाओं को उनके ही शासन क्षेत्र में दी गयी जागीर होती थी।इस पर उसका वंशानुगत अधिकार होता था।यह हस्तांतरित नहीं होती थी। सर्वप्रथम वतनजागीर को साम्राज्य में मिलाने का प्रयास औरंगजेब ने मारवाङ के संदर्भ में किया था।

  • मदद-ए-माश-

इसे सयूरगल और मिल्क (अमलाक) भूमि के रूप में जाना जाता था।राजस्थान में इसे शासन कहा जाता था यह भूमि दान स्थायी एवं वंशानुगत होता था। यद्यपि अकबर इस अधिकार का स्वयं उपभोग करता था।यह भूमि स्थानान्तरित नहीं होती थी और अनुदानग्राही के पास वंशानुगत रूप से रहती थी।

  • ऐम्मा –

यह भूमि प्रार्थना एवं प्रशंसा के लिए मुस्लिम धर्म-विदो एवं उलेमाओं को दी जाती थी।

  • वक्फ-

धार्मिक कार्यों के लिए संस्थाओं को दी जाने वाली भूमि एवं धन संपत्ति आदि थी।

  • अलतमगा –

जहाँगीर द्वारा प्रारंभ की गयी यह तैमूरी परंपरा पर आधारित था। यह विशेष शाही कृपा प्राप्त धार्मिक व्यक्ति को वंशानुगत रूप से दी जाती थी। इसे विशेष परिस्थिति में शाही आदेश द्वारा ही रद्द किया जा सकता था। यह मदद-ए-माश के अनुरूप ही होती थी।

  • वजीफा –

यह अनुदान दीन-दुखियों,अपाहिजों,विद्वानों और धार्मिक व्यक्तियों को नकद रूप में दिया जाता था।इन सभी अनुदानों के लिए एक पृथक विभाग होता था जिसका अध्यक्ष सद्र-उस-सुदूर होता था, किन्तु अकबर के काल में इस अधिकार का प्रयोग स्वयं बादशाह ने किया था।

  • खालसा –

यह वह भूमि होती थी जिसका प्रबंध केन्द्रीय सरकार की ओर से होता था और जिसकी आय राज्य के लिए सुरक्षित होती थी।खालिसा भूमि साम्राज्य के कुल भूमि का 20 प्रतिशत हिस्सा थी,किन्तु इसका क्षेत्रफल बादशाह की मरजी से घटता-बढता रहता था।जहाँगीर के समय में खालिसा भूमि का क्षेत्रफल बहुत कम हो गया था,किन्तु शाहजहाँ ने इसमें वृद्धि की।खालिसा जमीन को जागीर में और जागीर को खालिसा भूमि में परिवर्तित किया जा सकता था। जहाँगीर के काल में खालिसा भूमि के अंतर्गत कुल भूमि का 1/9 भाग था किन्तु औरंगजेब के शासनकाल में यह बढकर कुल भूमि का 1/5 भाग हो गया था।

Reference : http://www.indiaolddays.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *