जूनागढ रियासत की समस्या क्या थी

सितंबर,1947 ई. में जूनागढ ने पाकिस्तान में सम्मिलित होना स्वीकार कर लिया। यहाँ मुस्लिम नवाब था, परंतु इस राज्य की बहुसंख्यक जनता हिन्दू थी, जो भारत में रहना चाहती थी।

यह राज्य भारतीय सीमाओं से घिरा हुआ था अर्थात् भौगोलिक दृष्टि से यह राज्य भारत का अभिन्न अंग था। इसलिए वहाँ की जनता ने नवाब की कार्यवाही का जबरदस्त विरोध किया और एक स्वतंत्र अस्थायी हुकूमत की स्थापना कर ली।

भारत सरकार ने भी नवाब की कार्यवाही की घोर निन्दा की। ऐसी स्थिति में नवाब अपने राज्य को छोङकर पाकिस्तान भाग गया।

जूनागढ के दीवान शाहनवाज भुट्टो(जुल्फिकार अली भुट्टो के पिता) ने 8 नवंबर, 1947 को जूनागढ के भारत में विलय से संबंधित एक पत्र भारत सरकार को लिखा। श्री भुट्टो की प्रार्थना स्वीकार कर ली गयी, और 9 नवंबर 1947 को भारत ने जूनागढ का प्रशासन अपने हाथ में ले लिया।

और बाद में फरवरी, 1948 ई. में जनमत-संग्रह करके जूनागढ रियासत भारत संघ में शामिल कर लिया गया। जनमत-संग्रह में 1,80,000 मतदाताओं में से केवल 91 मत पाकिस्तान में विलय के पक्ष में पङे।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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