आजादी के बाद भारत का एकीकरण (रियासतों का एकीकरण)

स्वतंत्रता प्राप्ति के अवसर पर भारत में प्रायः 140 राज्य ऐसे थे, जहाँ जनतंत्रीय शासन-व्यवस्था नहीं थी, बल्कि वहाँ के नवाब अथवा राजा वहाँ का शासन चलाते थे।

ब्रिटिश संसद ने 4 जुलाई,1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तावित किया, जो 18 जुलाई, 1947 को स्वीकृत किया गया।

इस अधिनियम के अनुसार यह निश्चित किया गया,कि 15 अगस्त, 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बनाकर उन्हें सत्ता सौंप दी जायेगी। और दोनों अधिराज्यों में एक-2 गवर्नर जनरल होगा, जिसकी नियुक्ति उनके मंत्रिमंडल की सलाह से की जायेगी।

इस अधिनियम में यह भी प्रावधान था, कि जब तक संविधान सभा द्वारा नये संविधान का निर्माण नहीं कर लिया जाता है, तब तक संविधान सभाएं ही विधानमंडल के रूप में कार्य करेंगी और यह शासन कार्य 1935 के भारतीय शासन अधिनियम के आधार पर किया जायेगा।

रियासतों के संदर्भ में ब्रिटिश सर्वोपरिता का अंत कर दिया गया और उन्हें किसी भी अधिराज्य में सम्मिलित होने व अपने भावी संबंधों का निर्धारण करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।

15 जून,1947 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने घोषणा की, कि वह भारत की किसी भी रियासत को स्वतंत्रता की घोषणा करने तथा भारत के अवशिष्टांश से पृथक होकर रहने के अधिकार को कबूल नहीं कर सकती।

भारत सरकार ने 5जुलाई, 1947 को भारतीय रियासत विभाग नामक एक पृथक विभाग की स्थापना की, जिसका कार्यभार सरदार बल्लभ भाई पटेल को सौंपा दिया गया।

भारत सरकार का रियासतों से संबंध दो प्रक्रियाओं द्वारा नियमित हुआ-

  1. छोटी रियासतों का केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रशासित किसी भी ईकाई या पङोस के प्रांतों में मिल जाना। इस प्रक्रिया के तहत पूर्वी रियासतें उङीसा और मध्य प्रदेश के प्रांतों में मिल गयी तथा दक्कन की रियासतें एवं गुजरात की रियासतें बंबई प्रांत में मिल गयी।
  2. कुछ रियासतों का मिलकर वृहत्तर प्रशासनिक संघ बन जाना। इसके तहत- काठियावाङ (सौराष्ट्र) का संयुक्त राज्य, मत्स्य का संयुक्त राज्य, राजस्थान का संयुक्त राज्य,विन्ध्य प्रदेश का संयुक्त राज्य,विकसित करना था। ग्वालियर, इंदौर और मालवा का संयुक्त राज्य तथा पटियाला एवं ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन (पेप्सू) बनें।

मयूरभंज उङीसा में, कोल्हापुर बंबई में रामपुर एनं बनारस उत्तर प्रदेश में तथा बङौदा की रियासत बंबई प्रांत में मिल गयी। जबकि भोपाल, कूच विहार, त्रिपुरा तथा मणिपुर केन्द्रीय प्रशासन के अंतर्गत चले गये।

भारत सरकार की ओर से भारतीय रियासतों से बातचीत करने का उत्तरदायित्व अंतरिम सरकार के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल पर था।

इसके अतिरिक्त 1921 ई. में स्थापित चैम्बर आफ प्रिन्सेस के चान्सलर महाराज पटियाला ने सरादर पटेल को इस कार्य में सहायता प्रदान की।

जिसके फलस्वरूप 15 अगस्त,1947 ई. तक 136 भारतीय राज्यों ने भारत में सम्मिलित होना स्वीकार कर लिया था। केवल जूनागढ,हैदराबाद तथा कश्मीर तीन राज्य ऐसे थे, जिन्होंने भारत संघ में शामिल होने से इंकार कर दिया।

लार्ड माउंटबेटन ने भारतीय नरेशों से दो सस्तावेजों इस्ट्रूमेण्ट आफ एक्शेसन और स्टेंडस्टिल एग्रीमेण्ट पर हस्ताक्षर करने का परामर्श दिया था।

15अगस्त,1947 ई. के बाद सिर्फ जूनागढ, हैदराबाद एवं कश्मीर के राज्य तथा पुर्तगाली एवं फ्रांसीसी उपनिवेशों का भारत में सम्मिलित होना शेष रह गया था।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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