मुगल काल की न्याय प्रणाली

न्याय व्यवस्था

अन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

मुगल बादशाह स्वयं राज्य का सबसे बङा न्यायाधीश होता था। वह प्रत्येक बुधवार को अदालत में बैठकर निर्णय देता था। बादशाह के बाद काजी मुख्य न्यायाधीश होता था।उसकी सहायता के लिए मुफ्ती नियुक्त होते थे, जो कुरान के कानून की व्याख्या करते थे।

काजियों की अदालत में अधिकांशतया धर्म-संबंधी या सम्पत्ति-संबंधी मुकदमें आया करते थे।

अकबर ने अपने शासनकाल में हिन्दू पंडितों को हिन्दुओं के मुकदमों का निर्णय करने के लिए नियुक्त किया था।

जहाँगीर ने श्रीकांत नामक एक हिन्दू को हिन्दुओं के मुकदमों का निर्णय करने के लिए जज नियुक्त किया था।

अकबर को छोङकर सभी मुगल बादशाहों ने इस्लामी कानून व्यवस्था को ही न्याय का आधार माना था।

न्याय के क्षेत्र में सबसे अधिक सराहनीय कार्य औरंगजेब ने फतवा-ए-आलमगीरी का संकलन कराकर किया।

औरंगजेब राजकीय धर्म निरपेक्ष कानून(जबावित) जारी कराने से नहीं हिचकिचाया। उसके आदेशों को जबावित-ए-आलमगीरी में संग्रहित किया गया।

Reference : http://www.indiaolddays.com

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